US-China टैरिफ विवाद
भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर वैश्विक तनाव का असर दिखाई दिया है। 13 अक्टूबर को Sensex और Nifty ने लगातार दो दिनों की तेजी के बाद गिरावट के साथ शुरुआत की। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा चीन पर नए और कड़े टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने के फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल बढ़ गई है, जिसका सीधा असर भारतीय निवेशकों की भावना पर पड़ा। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर बाजार में यह गिरावट क्यों आई, किन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा झटका लगा और आगे का रुख कैसा रह सकता है।
बाजार की शुरुआत लाल निशान में
13 अक्टूबर की सुबह बाजार ने नकारात्मक रुख के साथ शुरुआत की। सुबह 10:04 बजे तक Sensex 320.79 अंक या 0.39% गिरकर 82,180.03 पर आ गया। वहीं, Nifty 93.45 अंक या 0.37% टूटकर 25,191.90 पर कारोबार कर रहा था।
मार्केट की ब्रेड्थ कमजोर दिखी —
लगभग 1,294 शेयरों में तेजी, जबकि 2,154 शेयरों में गिरावट और 170 शेयर बिना बदलाव के रहे। यानी साफ है कि बिकवाली का दबाव लगभग सभी सेक्टर्स में दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी लगभग 0.5% की गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट की बड़ी वजह – US-China टैरिफ वॉर

वैश्विक बाजार की यह गिरावट अचानक नहीं आई।
इसका सबसे बड़ा कारण है – अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता व्यापारिक तनाव।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में चीन से आने वाले कई उत्पादों पर उच्च टैरिफ (Import Duty) लगाने का आदेश दिया है। यह कदम चीन के निर्यात पर सीधा असर डालता है, क्योंकि अमेरिका चीन के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। इस घोषणा के बाद एशियाई और यूरोपीय बाजारों में बिकवाली शुरू हो गई। हांगकांग, शंघाई और निक्केई इंडेक्स सभी में गिरावट देखी गई, और उसी ट्रेंड को भारतीय बाजार ने भी फॉलो किया।
वैश्विक निवेशकों की चिंता – “रिस्क ऑफ” मूड में मार्केट
वैश्विक निवेशकों के बीच अब “Risk-Off” सेंटिमेंट बढ़ रहा है।
जब राजनीतिक या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अपने पैसे सुरक्षित निवेशों जैसे सोना, डॉलर या बॉन्ड में लगाने लगते हैं। भारत जैसे उभरते बाजारों से Foreign Institutional Investors (FIIs) अपनी पूंजी निकालना शुरू कर देते हैं, जिससे शेयर बाजार पर तुरंत दबाव पड़ता है।
पिछले कुछ दिनों में FII की बिकवाली ₹4,000 करोड़ से अधिक रही है, जो इस गिरावट की एक और बड़ी वजह है।
किन सेक्टर्स पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
बाजार में यह गिरावट हर सेक्टर में समान रूप से नहीं दिखी।
कुछ सेक्टर्स में ज्यादा दबाव रहा, जबकि कुछ ने मजबूती भी दिखाई।
नुकसान में रहे सेक्टर्स:
- आईटी सेक्टर (IT):
अमेरिकी मार्केट में मंदी के डर से आईटी कंपनियों पर असर पड़ा।
Infosys, TCS और HCL Tech जैसे दिग्गज स्टॉक्स में 1% से अधिक की गिरावट आई। - मेटल सेक्टर (Metal):
चीन पर टैरिफ लगने से मेटल की मांग में कमी की आशंका बनी हुई है।
टाटा स्टील, JSW Steel और Hindalco जैसे स्टॉक्स लाल निशान में रहे। - रियल्टी (Realty):
ब्याज दरों के बढ़ने और निवेशकों की सतर्कता के चलते रियल एस्टेट शेयरों में भी दबाव रहा। - कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables):
घरेलू मांग में सुस्ती और त्योहारी सीजन के बावजूद कमजोर सेंटिमेंट ने इन स्टॉक्स को प्रभावित किया।
हरे निशान में रहा सेक्टर:
- ऑटो सेक्टर (Auto):
आश्चर्यजनक रूप से ऑटो शेयरों में हल्की तेजी देखी गई।
Maruti Suzuki, Tata Motors और Hero MotoCorp जैसे स्टॉक्स में 0.5% तक की बढ़त दर्ज की गई।
विश्लेषकों के अनुसार, यह त्योहारी मांग और बिक्री में सुधार की उम्मीद का नतीजा है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव

बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोर रहे।
Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 में क्रमशः 0.45% और 0.52% की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों ने इन श्रेणियों में भी मुनाफावसूली की, क्योंकि ये शेयर आम तौर पर अधिक वोलाटाइल (volatile) माने जाते हैं।
बाजार विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट का संबंध मुख्य रूप से वैश्विक परिस्थितियों से है।
भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था फिलहाल स्थिर है, लेकिन बाहरी दबाव अल्पकालिक झटके दे सकते हैं।
Kotak Securities के वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा –
“US-China टैरिफ विवाद एक बार फिर से व्यापारिक माहौल को अनिश्चित बना रहा है।
निवेशक फिलहाल सावधानी बरतें, और लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करें।”
वहीं, Motilal Oswal Financial Services ने कहा कि यह गिरावट सिर्फ एक तकनीकी करेक्शन हो सकता है, और यदि वैश्विक हालात सामान्य हुए तो बाजार जल्द ही रिकवरी दिखा सकता है।
डॉलर, तेल और रुपया – तिहरा असर
इस गिरावट का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहा।
रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और 83.27 प्रति डॉलर तक चला गया।
वहीं, क्रूड ऑयल की कीमतें भी बढ़कर $86 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे आयातक देश पर अतिरिक्त दबाव बना।
डॉलर इंडेक्स मजबूत होने से विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश महंगा पड़ने लगा, जिसके चलते वे अपना पैसा निकाल रहे हैं।
आने वाले दिनों में क्या उम्मीद करें?
आने वाले हफ्ते में बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका-चीन वार्ता और वैश्विक आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी।
यदि टैरिफ विवाद और बढ़ता है, तो शेयर बाजारों में और कमजोरी आ सकती है।
हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत स्थिति (fundamentals) मजबूत है —
- बैंकिंग सेक्टर में सुधार
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च
- डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार
ये सभी तत्व बाजार को लंबी अवधि में सपोर्ट दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए रणनीति क्या होनी चाहिए?
इस तरह के अस्थिर समय में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए।
बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि:
- लॉन्ग टर्म स्टॉक्स में बने रहें, घबराकर बिकवाली न करें।
- क्वालिटी स्टॉक्स जैसे – HDFC Bank, ITC, TCS, Reliance आदि पर ध्यान दें।
- शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से बचें क्योंकि वोलाटिलिटी बढ़ी हुई है।
- SIP निवेशकों के लिए यह समय औसत लागत घटाने (Cost Averaging) का बेहतर मौका है।
क्या Sensex-Nifty फिर संभल पाएंगे?
अगर वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटती है और विदेशी निवेशक वापस आते हैं, तो भारतीय बाजार में रिकवरी की पूरी संभावना है।
पिछले कुछ वर्षों के इतिहास में भी देखा गया है कि जब भी इस तरह की भू-राजनीतिक हलचलें हुई हैं, भारतीय बाजार ने कुछ हफ्तों में फिर मजबूती हासिल की है।
इसलिए फिलहाल बाजार में घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि “Buy on Dips” (गिरावट पर खरीद) रणनीति अपनाना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
गिरावट में भी है अवसर

US-China टैरिफ विवाद ने एक बार फिर साबित किया है कि वैश्विक राजनीति का सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ता है।
लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती, घरेलू खपत और सरकारी नीतियां इसे लंबे समय में टिकाऊ बनाती हैं।
आज की गिरावट अस्थायी है, लेकिन इसका फायदा उन निवेशकों को मिलेगा जो धैर्य और समझदारी से कदम उठाएंगे।
जैसा कि मशहूर निवेशक वॉरेन बफेट कहते हैं —
“जब बाकी सब डर रहे हों, तब खरीदो; और जब सब लालच में हों, तब बेचो।”
मुख्य बिंदु एक नजर में
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| Sensex स्तर | 82,180.03 (↓ 320.79 अंक) |
| Nifty स्तर | 25,191.90 (↓ 93.45 अंक) |
| मिडकैप/स्मॉलकैप गिरावट | ~0.5% |
| सबसे प्रभावित सेक्टर | IT, Metal, Realty, Consumer Durables |
| मजबूत सेक्टर | Auto |
| मुख्य वजह | US-China Tariff War |
| रुपया बनाम डॉलर | ₹83.27 प्रति डॉलर |
| क्रूड ऑयल प्राइस | $86 प्रति बैरल |
| FII Activity | ₹4,000 करोड़ की बिकवाली |
US-China व्यापारिक तनाव भले ही अल्पकालिक उथल-पुथल पैदा कर रहा हो, लेकिन भारत का शेयर बाजार अब पहले की तुलना में ज्यादा परिपक्व और संतुलित है।
Sensex और Nifty में आने वाली यह गिरावट एक अवसर बन सकती है – बशर्ते निवेशक अपनी नजरें लंबी अवधि पर रखें और घबराने के बजाय रणनीतिक रूप से निवेश करें।






